सरल गाइड
पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था (FY 2026-27): स्लैब, कटौतियाँ, उदाहरण और कौन-सी बचाएगी ज़्यादा टैक्स
FY 2026-27 (AY 2027-28) के लिए पुरानी और नई आयकर व्यवस्था की पूरी तुलना: स्लैब, रिबेट, हर कटौती, ब्रेक-ईवन तालिका, उदाहरण, चुनने और बदलने का तरीक़ा और आम ग़लतियाँ।
हर वेतनभोगी और करदाता को हर साल एक सवाल का जवाब देना होता है: पुरानी व्यवस्था या नई व्यवस्था? इस गाइड में दोनों व्यवस्थाएँ पूरी तरह समझाई गई हैं: स्लैब, कौन-सी कटौती मिलती है और कौन-सी जाती है, उदाहरण, और फ़ैसला करने का आसान तरीक़ा, ताकि आपको किसी और वेबसाइट पर जाना न पड़े।
संक्षेप में जवाब
- नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है। आप कुछ न करें तो टैक्स इसी के हिसाब से लगता है।
- नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की कर-योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ वेतनभोगी की लगभग ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर टैक्स शून्य है।
- पुरानी व्यवस्था तभी फ़ायदे में रहती है जब आपकी कुल कटौतियाँ काफ़ी बड़ी हों। ₹15 लाख की सैलरी पर इसका मतलब है स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा लगभग ₹5.4 लाख की कटौतियाँ (होम लोन ब्याज, HRA, 80C, NPS, स्वास्थ्य बीमा आदि)।
- अगर आपकी आय सिर्फ़ वेतन, पेंशन या ब्याज से है, तो आप हर साल व्यवस्था बदल सकते हैं। कारोबार की आय वालों के लिए नियम सख़्त हैं (नीचे देखें)।
दोनों व्यवस्थाएँ आमने-सामने
| नई व्यवस्था | पुरानी व्यवस्था | |
|---|---|---|
| स्थिति | डिफ़ॉल्ट | आपको ख़ुद चुननी पड़ती है |
| टैक्स दरें | कम, 7 स्लैब | ज़्यादा, 4 स्लैब |
| टैक्स-मुक्त आय (रिबेट) | ₹12 लाख कर-योग्य आय तक | ₹5 लाख कर-योग्य आय तक |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन (वेतन, पेंशन) | ₹75,000 | ₹50,000 |
| 80C (PPF, EPF, ELSS, LIC आदि) | नहीं मिलती | ₹1.5 लाख तक |
| HRA और LTA की छूट | नहीं मिलती | मिलती है |
| होम लोन ब्याज (ख़ुद रहने वाला घर) | नहीं मिलता | ₹2 लाख तक |
| स्वास्थ्य बीमा (80D) | नहीं मिलता | ₹25,000 से ₹1 लाख तक |
| नियोक्ता का NPS योगदान | मिलता है (मूल वेतन और DA का 14% तक) | मिलता है (10%, सरकारी कर्मचारियों के लिए 14%) |
| अतिरिक्त NPS ₹50,000 (80CCD 1B) | नहीं मिलता | मिलता है |
| किसके लिए बेहतर | कम कटौतियों वाले ज़्यादातर लोग | बड़े होम लोन, HRA और निवेश वाले लोग |
FY 2026-27 (निर्धारण वर्ष 2027-28) के टैक्स स्लैब
स्लैब FY 2025-26 जैसे ही हैं। ये 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच की आय पर लागू होते हैं, जिसे आप 2027 में ITR में दिखाएँगे।
नई व्यवस्था
| कर-योग्य आय | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹4,00,000 तक | शून्य |
| ₹4,00,001 से ₹8,00,000 | 5% |
| ₹8,00,001 से ₹12,00,000 | 10% |
| ₹12,00,001 से ₹16,00,000 | 15% |
| ₹16,00,001 से ₹20,00,000 | 20% |
| ₹20,00,001 से ₹24,00,000 | 25% |
| ₹24,00,000 से ऊपर | 30% |
पुरानी व्यवस्था (60 साल से कम उम्र)
| कर-योग्य आय | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹2,50,000 तक | शून्य |
| ₹2,50,001 से ₹5,00,000 | 5% |
| ₹5,00,001 से ₹10,00,000 | 20% |
| ₹10,00,000 से ऊपर | 30% |
वरिष्ठ नागरिक (सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में): 60 से 79 साल की उम्र के लिए शून्य टैक्स वाली सीमा ₹3 लाख और 80 साल या उससे ज़्यादा के लिए ₹5 लाख है। नई व्यवस्था में उम्र चाहे जो हो, स्लैब सबके लिए एक जैसे हैं।
ऊपर से हमेशा जुड़ता है: टैक्स पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस। ज़्यादा आय वालों पर सरचार्ज भी लगता है: ₹50 लाख से ऊपर 10%, ₹1 करोड़ से ऊपर 15% और ₹2 करोड़ से ऊपर 25%। पुरानी व्यवस्था में ₹5 करोड़ से ऊपर 37% सरचार्ज भी है, जो नई व्यवस्था में नहीं है।
₹12 लाख तक टैक्स-मुक्त कैसे होता है
नए स्लैब में ₹12 लाख पर टैक्स ₹60,000 बनता है (दूसरे स्लैब का ₹20,000 और तीसरे का ₹40,000)। धारा 87A में ₹60,000 तक की रिबेट मिलती है, इसलिए टैक्स शून्य हो जाता है। वेतनभोगी के लिए: ₹12,75,000 की सैलरी में से ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने पर ₹12,00,000 बचते हैं, जिन पर टैक्स शून्य है।
- मार्जिनल रिलीफ़: अगर आपकी कर-योग्य आय ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर है, तो टैक्स उस रकम से ज़्यादा नहीं हो सकता जितनी आय ₹12 लाख से ऊपर है। ₹12,10,000 की कर-योग्य आय पर टैक्स अधिकतम ₹10,000 होगा, पूरे स्लैब के हिसाब से नहीं।
- रिबेट सिर्फ़ भारत के निवासी करदाताओं के लिए है और आम तौर पर विशेष दरों पर लगने वाले कैपिटल गेन के टैक्स को कम नहीं करती।
- पुरानी व्यवस्था में 87A रिबेट ₹12,500 है और सिर्फ़ तब मिलती है जब कर-योग्य आय ₹5 लाख तक हो।
कटौतियाँ: क्या जाती है और क्या बचती है
नई व्यवस्था में मिलने वाली
- ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन (वेतन और पेंशन की आय पर)
- नियोक्ता का NPS योगदान, मूल वेतन और DA के 14% तक
- पारिवारिक पेंशन पर ₹25,000 की कटौती
- रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी, छुट्टी के बदले नकद जैसी छूट, सामान्य सीमाओं में
- दिव्यांगजनों के लिए ट्रांसपोर्ट भत्ता
सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में मिलने वाली
| कटौती | सीमा | किस पर मिलती है |
|---|---|---|
| धारा 80C | ₹1,50,000 | EPF, PPF, ELSS, जीवन बीमा प्रीमियम, 5 साल की टैक्स-सेवर FD, NSC, सुकन्या समृद्धि, बच्चों की ट्यूशन फ़ीस, होम लोन का मूलधन |
| धारा 80CCD(1B) | ₹50,000 अतिरिक्त | आपका अपना NPS योगदान, 80C से अलग |
| धारा 80D | ख़ुद और परिवार के लिए ₹25,000 (वरिष्ठ हों तो ₹50,000); माता-पिता के लिए ₹25,000 (वरिष्ठ हों तो ₹50,000) | स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और ₹5,000 तक की निवारक स्वास्थ्य जाँच |
| होम लोन ब्याज (24b) | ख़ुद रहने वाले घर के लिए ₹2,00,000 | EMI में ब्याज वाला हिस्सा |
| HRA छूट | तीन रकमों में से सबसे कम (नीचे देखें) | HRA पाने वाले वेतनभोगी का दिया किराया |
| LTA | भारत के भीतर यात्रा का असली ख़र्च, 4 साल के ब्लॉक में 2 यात्राओं के लिए | नियोक्ता से मिला यात्रा भत्ता |
| धारा 80E | कोई ऊपरी सीमा नहीं, 8 साल तक | शिक्षा ऋण का ब्याज |
| धारा 80TTA / 80TTB | ₹10,000 / ₹50,000 (वरिष्ठ नागरिक) | सेविंग्स खाते का ब्याज (वरिष्ठों के लिए जमा का भी) |
| धारा 80G | अलग-अलग | मान्य कोषों और संस्थाओं को दान |
| धारा 80DD, 80U | तय रकम | ख़ुद या आश्रित की दिव्यांगता |
HRA की छूट कैसे गिनी जाती है
छूट की रकम इन तीनों में से सबसे कम होती है: (1) आपको असल में मिला HRA, (2) दिया गया किराया घटाकर मूल वेतन और DA का 10%, और (3) दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या चेन्नई में रहने पर मूल वेतन और DA का 50%, वरना 40%। अगर आप माता-पिता को किराया देते हैं, तो उन्हें इसे अपनी आय में दिखाना होगा। किराये की रसीदें रखें, और साल का किराया ₹1 लाख से ज़्यादा हो तो मकान मालिक का PAN भी चाहिए।
कौन-सी बेहतर है? ब्रेक-ईवन तालिका
अपने आँकड़ों से देखना चाहते हैं? हमारा मुफ़्त पुरानी बनाम नई टैक्स कैलकुलेटर आज़माएँ, जो आपकी सैलरी और कटौतियों के हिसाब से दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करता है।
तालिका में मान लिया गया है कि व्यक्ति वेतनभोगी है, उसकी उम्र 60 से कम है और आय सिर्फ़ वेतन से है। इसमें नई व्यवस्था में टैक्स (सेस सहित) दिया गया है, और यह कि पुरानी व्यवस्था में उतना ही टैक्स आने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा कितनी कटौतियाँ चाहिए। अगर आपकी कुल कटौतियाँ इस आँकड़े से ज़्यादा हैं, तो पुरानी व्यवस्था बेहतर है।
| सकल सैलरी | नई व्यवस्था में टैक्स | पुरानी व्यवस्था बराबर होने के लिए चाहिए कटौती |
|---|---|---|
| ₹10 लाख | शून्य | ₹4.5 लाख |
| ₹12 लाख | शून्य | ₹6.5 लाख |
| ₹15 लाख | ₹97,500 | लगभग ₹5.4 लाख |
| ₹20 लाख | ₹1,92,400 | लगभग ₹7.1 लाख |
| ₹25 लाख | ₹3,19,800 | लगभग ₹8 लाख |
साल भर की अपनी असली कटौतियाँ जोड़ें: 80C (₹1.5 लाख तक), अतिरिक्त NPS (₹50,000), स्वास्थ्य बीमा, होम लोन ब्याज (₹2 लाख तक) और HRA की छूट। ₹15 लाख से कम सैलरी वाले बहुत कम लोग होम लोन या ज़्यादा किराये के बिना ब्रेक-ईवन तक पहुँचते हैं।
दो उदाहरण (सकल सैलरी ₹15 लाख)
| उदाहरण 1: किराया नहीं, होम लोन है | उदाहरण 2: वही, साथ में किराया और HRA | |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹50,000 | ₹50,000 |
| 80C | ₹1,50,000 | ₹1,50,000 |
| अतिरिक्त NPS (80CCD 1B) | ₹50,000 | ₹50,000 |
| स्वास्थ्य बीमा (80D) | ₹25,000 | ₹25,000 |
| होम लोन ब्याज | ₹2,00,000 | ₹2,00,000 |
| HRA छूट | शून्य | ₹1,50,000 |
| पुरानी व्यवस्था में कर-योग्य आय | ₹10,25,000 | ₹8,75,000 |
| पुरानी व्यवस्था में टैक्स (सेस सहित) | ₹1,24,800 | ₹91,000 |
| नई व्यवस्था में टैक्स (सेस सहित) | ₹97,500 | ₹97,500 |
| बेहतर विकल्प | नई में ₹27,300 की बचत | पुरानी में ₹6,500 की बचत |
उदाहरण 1 पुरानी व्यवस्था में ऐसे बनता है: ₹10,25,000 पर टैक्स = ₹12,500 (दूसरा स्लैब) + ₹1,00,000 (तीसरा स्लैब) + ₹7,500 (₹25,000 का 30%) = ₹1,20,000, ऊपर से 4% सेस जोड़ने पर ₹1,24,800। नई व्यवस्था में कर-योग्य आय ₹14,25,000 है: टैक्स ₹93,750, 4% सेस जोड़ने पर ₹97,500।
चार कदमों में फ़ैसला कैसे करें
- साल की अपनी कुल सकल आय लिखें।
- पुरानी व्यवस्था में जो कटौतियाँ आप सच में लेंगे, उनकी सूची बनाएँ: जो 80C निवेश आप वैसे भी करते, NPS, स्वास्थ्य बीमा, होम लोन ब्याज और HRA की छूट।
- कुल रकम की तुलना ऊपर की तालिका में अपनी सैलरी के ब्रेक-ईवन आँकड़े से करें।
- अगर दोनों पास-पास हों, तो दोनों टैक्स ठीक से निकालें (उदाहरण में तरीक़ा दिया है), या अपने नियोक्ता के पेरोल टूल से देखें, जो आम तौर पर दोनों की तुलना दिखा देता है।
सिर्फ़ कटौती पाने के लिए ऐसे निवेश न करें जो आपके लिए ठीक नहीं। ग़लत निवेश से जितना टैक्स बचता है, उससे ज़्यादा नुक़सान हो सकता है।
आम तौर पर किसके लिए कौन-सी बेहतर
| आपकी स्थिति | आम तौर पर बेहतर |
|---|---|
| ₹12.75 लाख तक सैलरी और कम कटौतियाँ | नई व्यवस्था (टैक्स शून्य) |
| युवा पेशेवर, होम लोन नहीं, बड़े निवेश नहीं | नई व्यवस्था |
| बड़े ब्याज वाला होम लोन, साथ में HRA, 80C और NPS | पुरानी व्यवस्था, अगर कुल कटौतियाँ ब्रेक-ईवन पार करें |
| महानगर में ज़्यादा किराया और HRA मिलता है | पुरानी व्यवस्था जाँचें |
| ज़्यादा ब्याज आय और स्वास्थ्य बीमा वाले वरिष्ठ नागरिक | पुरानी व्यवस्था जाँचें, क्योंकि 80TTB और 80D उदार हैं |
| ₹24 लाख से ज़्यादा सैलरी | नई व्यवस्था, जब तक कटौतियाँ लगभग ₹8 लाख से ज़्यादा न हों |
चुनें कैसे और बदलें कैसे
अगर आप वेतनभोगी या पेंशनर हैं (कारोबार की आय नहीं)
- वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अपने नियोक्ता को बताएँ कि कौन-सी व्यवस्था चाहिए। नियोक्ता उसी के हिसाब से TDS काटता है। आप कुछ न बताएँ तो नई व्यवस्था लगती है।
- आप हर साल अलग व्यवस्था चुन सकते हैं।
- TDS वाली व्यवस्था अंतिम नहीं होती। ITR भरते समय आप दूसरी व्यवस्था चुन सकते हैं और ज़्यादा कटे टैक्स का रिफ़ंड ले सकते हैं। निवेश के सबूत तैयार रखें।
अगर आपकी कारोबार या पेशे से आय है
- नई व्यवस्था से बाहर निकलने के लिए रिटर्न भरने की नियत तारीख़ तक आयकर पोर्टल पर फ़ॉर्म 10-IEA भरना होता है।
- नई व्यवस्था में सिर्फ़ एक बार लौट सकते हैं। उसके बाद, जब तक कारोबार की आय है, आम तौर पर पुरानी व्यवस्था में वापस नहीं जा सकते।
- नियत तारीख़ चूकने पर उस साल आप नई व्यवस्था में ही बँध सकते हैं।
दोनों व्यवस्थाओं में एक जैसी बातें
- शेयर और म्यूचुअल फ़ंड से हुए लंबी और छोटी अवधि के कैपिटल गेन पर टैक्स, जिनकी अपनी विशेष दरें हैं।
- 4% सेस।
- बुनियादी छूट-सीमा से ज़्यादा आय होने पर ITR भरने की ज़रूरत।
- पूरी तरह छूट वाली आय, जैसे खेती की आय, कर-योग्य आय से बाहर ही रहती है।
आयकर अधिनियम, 2025 के बारे में एक बात
1 अप्रैल 2026 से 1961 के क़ानून की जगह नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू हुआ है, इसलिए कई धाराओं के नंबर बदल गए हैं। हम जाने-पहचाने नाम (80C, 80D, 87A) इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि ज़्यादातर पेरोल शीट, सलाहकार और पुराने लेख यही नाम लिखते हैं। दरें, सीमाएँ और दो व्यवस्थाओं में से चुनने की सुविधा इस गाइड में बताए अनुसार जारी हैं। आपकी ITR यूटिलिटी और पेस्लिप में नई धारा संख्याएँ दिख सकती हैं।
बचने वाली आम ग़लतियाँ
- सिर्फ़ स्लैब दरें देखना और ₹12 लाख की रिबेट भूल जाना, जिससे नई व्यवस्था काफ़ी ऊँचे स्तर तक मुफ़्त हो जाती है।
- ऐसी कटौतियाँ गिन लेना जो आप असल में नहीं लेंगे, और बाद में नुक़सान उठाना।
- यह भूल जाना कि HRA जैसी पुरानी-व्यवस्था की कटौतियों के लिए किराये की रसीद चाहिए, और साल का किराया ₹1 लाख से ज़्यादा हो तो मकान मालिक का PAN भी।
- नियोक्ता को एक व्यवस्था बताना और ITR में दूसरी चुनना, पर रिफ़ंड की जाँच न करना।
- कारोबारियों का फ़ॉर्म 10-IEA की तारीख़ चूक जाना।
- यह मान लेना कि नई व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिकों को ऊँचे स्लैब मिलते हैं। ऐसा नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या नई व्यवस्था अनिवार्य है?
नहीं। यह डिफ़ॉल्ट है, पर आप ऊपर बताई शर्तों के साथ पुरानी व्यवस्था चुन सकते हैं।
क्या नई व्यवस्था में PPF, ELSS या जीवन बीमा पर टैक्स लाभ मिलता है?
कटौती नहीं मिलती। लेकिन PPF का ब्याज मैच्योरिटी और निकासी पर अब भी टैक्स-मुक्त है, इसलिए बचत के विकल्प के तौर पर PPF उपयोगी रह सकता है। हमारी PPF गाइड पढ़ें।
अगर मेरे पास HRA या निवेश नहीं है, तो क्या ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगी?
हाँ। नई व्यवस्था में हर वेतनभोगी और पेंशनर को यह अपने आप मिलती है। इसके लिए कोई सबूत नहीं देना पड़ता।
क्या नियोक्ता का NPS योगदान नई व्यवस्था में काम आता है?
हाँ। मूल वेतन और DA के 14% तक का नियोक्ता का योगदान दोनों व्यवस्थाओं में घटाया जा सकता है। आपके अपने ₹50,000 के अतिरिक्त NPS की कटौती सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में है। हमारी NPS गाइड पढ़ें।
मैंने नियोक्ता को ग़लत व्यवस्था बता दी। क्या अब देर हो चुकी है?
अगर कारोबार की आय नहीं है, तो ITR भरते समय बेहतर व्यवस्था चुन सकते हैं और ज़्यादा कटे TDS का रिफ़ंड ले सकते हैं। हमारी ITR भरने की गाइड में पूरे कदम हैं।
क्या अगले साल दरें बदलेंगी?
हर केंद्रीय बजट में दरें बदल सकती हैं। व्यवस्था चुनने से पहले हर साल ब्रेक-ईवन दोबारा जाँचें।
स्रोत
- आयकर विभाग: व्यक्तियों के लिए कर दरें (पुरानी और नई व्यवस्था के स्लैब, सरचार्ज, सेस)
- आयकर विभाग: नई बनाम पुरानी कर व्यवस्था पर FAQ
- आयकर विभाग, ई-फ़ाइलिंग पोर्टल
- Business Today: FY 2026-27 के आयकर स्लैब
आख़िरी जाँच: 28 अक्टूबर 2026। टैक्स नियम हर बजट के साथ बदलते हैं और हर व्यक्ति का मामला अलग हो सकता है। यह गाइड सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं। जटिल मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट से बात करें।