सरल गाइड
PPF ब्याज दर कैसे तय होती है और कैसे गिनी जाती है
PPF का ब्याज आसान शब्दों में: दर कौन तय करता है, हर महीने कैसे गिना जाता है, महीने की 5 तारीख क्यों मायने रखती है, और साल-दर-साल का उदाहरण।
PPF का ब्याज उलझन भरा लग सकता है। दर समय-समय पर बदलती है, ब्याज हर महीने गिना जाता है, और खाते में साल में सिर्फ एक बार जुड़ता है। इस गाइड में हर हिस्से को आसान शब्दों में और एक उदाहरण के साथ समझाया गया है।
मुख्य बातें
- सरकार हर तिमाही के लिए PPF की दर घोषित करती है। अक्टूबर से दिसंबर 2026 के लिए यह 7.1% सालाना है, जो पिछली तिमाही जितनी ही है।
- ब्याज हर महीने की 5 तारीख से महीने के आखिरी दिन के बीच के सबसे कम बैलेंस पर गिना जाता है।
- यह हर वित्तीय वर्ष के अंत में, यानी 31 मार्च को, आपके खाते में जुड़ता है।
- ब्याज बैलेंस में जुड़ जाता है, इसलिए अगले सालों में उस पर भी ब्याज मिलता है। इसे चक्रवृद्धि (कंपाउंडिंग) कहते हैं।
दर कैसे तय होती है
वित्त मंत्रालय हर तिमाही शुरू होने से कुछ पहले सभी छोटी बचत योजनाओं, जिनमें PPF भी है, की ब्याज दरें घोषित करता है। चार तिमाहियाँ हैं: जनवरी से मार्च, अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर और अक्टूबर से दिसंबर। हर घोषणा में दर वही रह सकती है या बदल सकती है। यह दर लगातार कई तिमाहियों से 7.1% पर है, लेकिन इसके आगे भी वहीं रहने की कोई गारंटी नहीं।
जब दर बदलती है, तो वह सिर्फ नई जमा पर नहीं, आपके मौजूदा बैलेंस पर भी लागू होती है। इसी वजह से PPF 15 साल तक एक तयशुदा रिटर्न नहीं देता।
ब्याज की गणना कैसे होती है
- हर महीने योजना देखती है कि 5 तारीख के बाद से महीने के अंत तक आपके खाते में सबसे कम बैलेंस कितना रहा।
- उस महीने का ब्याज = वह सबसे कम बैलेंस × सालाना दर ÷ 12।
- ये मासिक रकमें अलग से नहीं दी जातीं। इन्हें जोड़कर वित्तीय वर्ष के अंत में आपके खाते में डाला जाता है।
- अगले साल से वह ब्याज आपके बैलेंस का हिस्सा बन जाता है और उस पर भी ब्याज मिलता है।
महीने की 5 तारीख क्यों मायने रखती है
5 तारीख तक (या उससे पहले) जमा की गई रकम उस महीने के सबसे कम बैलेंस में गिनी जाती है, इसलिए उस पर पूरे महीने का ब्याज मिलता है। 5 तारीख के बाद जमा की गई रकम अगले महीने से गिनी जाती है।
उदाहरण के लिए, 5 अप्रैल तक जमा किए गए ₹1,50,000 पर अप्रैल का ब्याज लगभग ₹887.50 बनता है (₹1,50,000 × 7.1% ÷ 12)। वही रकम 6 अप्रैल को जमा हो और उस महीने खाते में सिर्फ वही पैसा हो, तो अप्रैल के लिए कोई ब्याज नहीं मिलेगा। इसी वजह से कई लोग वित्तीय वर्ष की शुरुआत में, 5 अप्रैल से पहले जमा करते हैं।
साल-दर-साल का उदाहरण
मान लीजिए आप खाता खोलकर 5 अप्रैल तक ₹1,50,000 जमा करते हैं और हर साल यही करते हैं। हम मानते हैं कि दर पूरे समय 7.1% रहती है। पहले तीन साल ऐसे दिखेंगे:
| वर्ष | शुरुआती बैलेंस | जमा | साल का ब्याज | साल के अंत में बैलेंस |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ₹0 | ₹1,50,000 | ₹10,650 | ₹1,60,650 |
| 2 | ₹1,60,650 | ₹1,50,000 | ₹22,056 | ₹3,32,706 |
| 3 | ₹3,32,706 | ₹1,50,000 | ₹34,272 | ₹5,16,978 |
इसी तरह चलते रहें तो 15 सालाना जमा के बाद बैलेंस लगभग ₹40,68,209 होगा। इसमें ₹22,50,000 आपकी अपनी जमा है और लगभग ₹18,18,209 ब्याज। भविष्य में दर बदली तो ये आँकड़े भी बदलेंगे। अपनी रकम और दर के साथ देखने के लिए हमारा PPF कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
क्या ब्याज पर टैक्स लगता है?
मौजूदा नियमों में PPF का ब्याज आयकर से मुक्त है। विस्तार से जानने के लिए हमारी गाइड PPF की जमा सीमा और टैक्स लाभ पढ़ें। योजना की बुनियादी बातें पहले समझनी हों तो PPF क्या है? देखें।
स्रोत
- Public Provident Fund Scheme, 2019, पैराग्राफ 7 (ब्याज), वित्त मंत्रालय की अधिसूचना, India Post पर
- Outlook Money: अक्टूबर से दिसंबर 2026 के लिए छोटी बचत दरें अपरिवर्तित
आख़िरी जाँच: 27 अक्टूबर 2026। अगली दर घोषणा दिसंबर 2026 के अंत के आसपास अपेक्षित है। दरें और नियम बदल सकते हैं, इसलिए कदम उठाने से पहले अपने बैंक या India Post से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करें। यह गाइड सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं।